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Saturday, 25 April 2015

जनकपुर में जानकी मंदिर भी तबाह हो चुका है। इसे सीता माता का जन्मस्थल माना जाता है।



नेपाल के शहर जनकपुर विदेह राजा जनक की नगरी है। यहां पर मां जानकी का विशाल मंदिर है। जनकपुर प्राचीन मिथिला राज्य की राजधानी थी। यह वो पवित्र स्थान है जिसका धर्मग्रंथों, काव्यों एवं रामायण में उत्कृष्ट वर्णन है। धार्मिक ग्रंथों में उसे स्वर्ग से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। जनकपुर धाम प्राचीनकाल से ही हिंदुओं का आस्था केंद्र रहा है। यहां स्थित जानकी मंदिर देवी सीता को समर्पित है। कहा जाता है कि इस के निर्माण में नौ लाख रुपए खर्च हुए थे । इसलिए इसे नौलखा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। सीता माता को समर्पित जानकी मंदिर जनकपुर बाज़ार के उत्तर पश्चिम में स्थित है। वर्तमान जानकी मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुंअरि जी द्वारा 1967 में करवाया गया। मंदिर दूर से देखने में किसी महल सा लगता है।










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नेपाल भूकंप: ऐतिहासिक धरहरा मीनार धराशाई




कभी नेपाल की सबसे ऊंची रही धराहरा इमारत, जिसे आप नेपाल का कुतुब मीनार भी कह सकते हैं, को आज के भूकंप ने जमींदोज़ कर दिया है। सोशल मीडिया और नेपाल के स्थानीय न्यूज़ चैनल के मुताबिक़, नौ मंज़िली इमारत पूरी तरह तबाह हो गई है।

इस मीनार का निर्माण 1832 में महारानी ललित त्रिपुरा सुंदरी के आदेश पर तत्कालीन प्रधानमंत्री भीमसेन थापा ने कराया था। इसीलिए इसे भीमसेन टावर के नाम से भी जाना जाता है।

शनिवार सुबह 11.47 बजे भूकंप के झटके आए। रिक्‍टर स्‍केल पर इसकी तीव्रता 6 बताई जा रही है। भूकंप का केंद्र नेपाल में काठमांडू से 83 किमी दूर उत्‍तर-पश्चिम में था। वहां भूकंप की तीव्रता 7.7 बताई जा रही है।








भूकंप से हिले भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, नेपाल

भूकंप से हिले भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, नेपाल

शनिवार सुबह 11.47 बजे भूकंप के झटके आए। रिक्‍टर स्‍केल पर इसकी तीव्रता 6 बताई जा रही है। भूकंप का केंद्र नेपाल में काठमांडू से 83 किमी दूर उत्‍तर-पश्चिम में था। वहां भूकंप की तीव्रता 7.7 बताई जा रही है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप के झटके काफी तेज थे। दिल्ली, रांची, जयपुर, पटना, गुवाहाटी, लखनऊ, कोलकाता सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में करीब 2 मिनट तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नेपाल बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.4 थी।

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के आधार पर मापता है। रिक्टर स्केल पैमाने को सन 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुणा बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है वह प्रति स्केल 32 गुणा बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुणा बढ़ जाएगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 रिक्टर पैमाने पर आया भूकंप 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

भूकंप को मापने के लिए रिक्टर के अलावा मरकेली स्केल का भी इस्तेमाल किया जाता है। पर इसमें भूकंप को तीव्रता की बजाए ताकत के आधार पर मापते हैं। इसका प्रचलन कम है क्योंकि इसे रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है। भूकंप के कारण होने वाले नुकसान के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जैसे घरों की खराब बनावट, खराब संरचना, भूमि का प्रकार, जनसंख्या की बसावट आदि।

भूकंप आने पर तुरंत सुरक्षित खुले मैदान में जाएं। बड़ी इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों से दूर रहें।

 बाहर जाने के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।

भूकंप आने पर खिड़की, अलमारी, पंखे, ऊपर रखे भारी सामान से दूर हट जाएं ताकि इनके गिरने से चोट न लगे।

कहीं फंस गए हों तो दौड़ें नहीं। इससे भूकंप का ज्यादा असर होगा।

टेबल, बेड, डेस्क जैसे मजबूत फर्नीचर के नीचे छिप जाएं।

किसी मजबूत दीवार, खंभे से सटकर सिर, हाथ आदि को किसी मजबूत चीज़ से ढककर बैठ जाएं।

वाहन चला रहे हैं तो बिल्डिंग, होर्डिंग्स, खंभों, फ्लाईओवर, पुल से दूर सड़क के किनारे गाड़ी रोक लें।


Friday, 24 April 2015

सावधान !! आप का ब्लॉग खतरे में,



यह लेख केवल उन्हीं ब्लॉग लेखकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने ब्लॉग से प्यार करते हैं.

यदि आप अपने ब्लॉग में अपनी व्यक्तिगत बातें लिख रहे हैं या अपनी रचनाएं लिख रहे हैं और आप को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई पढ़ रहा है या नहीं, टिप्पणियाँ भी आप अपने लेख के लिए ज़रूरी नहीं समझते हैं तो यह लेख भी आप के लिए बेकार साबित होगा.

यदि आप किसी राजनीतिक विषय या किसी ऐसे विषय पर लेख लिख रहे हैं जिस के लिए पाठक और टिप्पणियाँ ज़रूरी हैं तो आप को ज़रूर ही यह लेख ध्यान से पढ़ना चाहिए.

यदि आप दो-तीन महीने से ब्लॉगिंग कर रहे हैं और आप की ब्लॉगिंग सीरियस है तथा आप लंबे समय तक लिखना चाहते हैं,

परन्तु अभी तक आप ने यह नहीं सोचा है कि आप किस विषय पर लिख रहे हैं या लिखेंगे तो आप का ब्लॉग खतरे में पड़ने वाला है.

ब्लॉगिंग शुरू करते समय तो हमें इस बात का ध्यान नहीं रहता कि हम किस विषय पर लिख रहे हैं,

परन्तु यदि जल्द ही हम इस और ध्यान नहीं देते हैं तो हमारे ब्लॉग की धीरे-धीरे मृत्यु होने लगती है.

किसी भी ब्लॉग की सांसें उसके पाठक और टिप्पणियाँ ही होते हैं.

अतः यह ध्यान देना ही होगा कि पाठक किस ब्लॉग पर जाता है और क्यों ?

पाठक उसी ब्लॉग को पसंद करते हैं जहाँ पर उनकी पसंद की सामग्री प्रचुर मात्र में मिल जाती है. यही आपके ब्लॉग को उन्नत बनाता है, उच्च रैंकिंग भी दिलाता है.

कोई भी पाठक किसी भी चिट्ठे पर उसके लेखों की गुणवत्ता और और संख्या को देखकर ही जाता है.

यदि आप के ब्लॉग पर 40 चुटकुले या व्यंग्य और 25 तकनीकी लेख लिखे गए हैं तो वह पाठक जो चुटकुला-प्रेमी है उसी ब्लॉग को पसंद करेगा जिस पर 60 चुटकुले हों या तकनीकी लेख न हों.

ऐसे फालतू के बोर लेखों से उसे क्या ! वह तो बस कुछ चुटकुले ही पढ़ना चाहता है.

चुटकुला-प्रेमी तकनीकी लेखों को देख भाग खड़ा होगा और ठीक ऐसा ही तकनीकी लेखों को पसंद करने वालों के साथ भी होगा.

अतः समय रहते अपने ब्लॉग का विषय सोच-समझ कर निर्धारित कर लें.

यदि आप को लगता है कि आप चुटकुले, खेल, व्यापार आदि विभिन्न विषयों पर लिख सकते हैं तो बेहतर होगा कि आप प्रत्येक के लिए अलग- अलग ब्लॉग बना लें.

अभी तो कुल मिलाकर हिन्दी में 14000 ( चौदह हज़ार ) ब्लॉग भी नहीं हुए हैं. अतः सम्भव है कि आप के ब्लॉग पर पाठक आ ही जाते हों, पर 2010 में या उसके बाद के वर्षों में क्या होगा इस पर भी यदि आज ही न सोचा गया तो कल आप का ब्लॉग ( चिट्ठा ) दम तोड़ देगा.

कैसे पहचानें कि अब आप एक इन्टरनेट कीड़ा हो गए हैं !!

जी हाँ, दोस्तों ब्लॉगिंग अब एक महामारी की तरह से बढ़ रही है. लोग परेशान हो रहे हैं.

पत्नी परेशान है कि कैसे इनकी ब्लॉगिंग की लत छुडाऊँ. घर में रोटी नहीं ई-गुरु बनने चले हैं.

बेटा परेशान सा बाप की कुर्सी के पीछे खडा है कि ये उठें तो मैं अपना ब्लॉग देखूं.

पत्नी कि ब्लॉगिंग से पति परेशान कि इनका वाचन ख़तम हो तो रोटी मिले.

ये बिलागिंग बड़ा ही भारी रोग हो चुका है भारत में. अब तक 7000 रोगियों कि पहचान हो चुकी है.

कैसे जानें इस रोग के लक्षण को. बहुत ही ज़रूरी है यह जानना ताकि आप अपना इलाज समय पर करवा सकें.

1. किसी की शादी में आप अपने पति को 'एडमिनिस्ट्रेटर' और बेटे को 'मोडरेटर' बता कर परिचय दें.

2. जब किसी से मिलने पर आपके मुंह से "जय राम जी की" के जगह पर "जय गूगल जी की" निकल जाए.

3. जब आप अपनी खांसी की दवा भी अपने ई-गुरु राज से पूछें.

4. जब आपकी पत्नी को खाना खिलाने लिए ई-मेल करके आपको बुलाना पड़ता हो.

5. जब आप किसी से -- अरे यार, फोटो देखिये -->



6. जब आपकी पत्नी दूसरी महिला से आपके बारे में कहे कि -- अरे सखी ! मेरे वो तो अब सुबह की कुल्ली भी पहली पोस्ट पब्लिश करके ही करते हैं.



दूसरी महिला - ये ई-गुरु तो बरबाद करके ही छोड़ेगा मेरे पति को, कल मेरे पति को फोटो लगना सिखाया था और आज विडियो लगाना भी सिखा दिया है.

और ये अब एक आर्टिकल में फोटो तो दूसरे में विडियो लगा रहे हैं.
और तो जैसे कोई काम रह ही नहीं गया है.

बच्चे की फीस इन्टरनेट में घुसा दी है. ये ई-गुरु तो बस पैसा डुबोना ही बता रहा है, कमाना तो बिल्कुल भी नहीं.

(वैसे मुझ पर बहुत ही बड़े-बड़े आरोप लगाए हैं आप सभी ने. साथियों बहुत ही जल्द मैं कमाई की भी बात करूंगा.)

7. जब आप किसी को बीच सड़क पर धिक्कारने लगें कि -- क्या !! तुम्हारा कोई ब्लॉग नहीं है !! (बेवकूफ औरत)



8. जी आप का एड्रेस क्या है, सुनते ही आप के मुंह से निकल जाए - ****@gmail.com
या फ़िर आप बोल जाएँ - *****.blogspot.com

9. जब आप किसी से मिलते ही उसका URL एड्रेस (Blog Address) पूछ बैठें.

ब्लॉग क्या है - What is a blog?

वेब-लॉग शब्द का संक्षिप्त रूप ही ब्लॉग कहा जाने लगा है.

यह शब्द १९९७ में अमेरिका में प्रथम बार इंटरनेट के सन्दर्भ में आया था.

ब्लॉग का मतलब पर्सनल डायरी या ऑनलाइन डायरी ही समझा जाता है, जहाँ आप कुछ भी लिख सकते हैं.

जो आप को अच्छा लगे लिखिए.

यदि आप कुछ बातें शेअर करना चाहते हैं तो वह भी कर सकते हैं.

आप अपनी इस ऑनलाइन डायरी में अपने फोटो और वीडियो भी जोड़ सकते हैं.

अपने लिए नेट पर एक जगह बना सकते हैं.

अपने व्यक्तिगत विचारों को कहने के साथ ही साथ आप दूसरों से समर्थन भी पा सकते हैं.

चाहें तो दूसरों का समर्थन भी कर सकते हैं.

अपनी कवितायें, कहानियां, राजनीतिक विचार किसी भी बारे में लिखें.

और कमाल की बात तो ये है कि पूरा विश्व आपको देख रहा और सुन रहा होता है.

आप चाहें तो अपने ब्लॉग को छुपा भी सकते हैं यानी दुनिया की नज़रों से अदृश्य और सिर्फ़ आपको दिखे या उसे दिखे जिसे आप चाहें.

यह वास्तव में बेहद कमाल की चीज़ है,

तभी तो पूरी दुनिया ख़ुद ब्लॉग लिखने को लेकर दीवानी हुई जा रही है. आप का भी इस ब्लॉग की दुनिया में मैं E-Guru raj स्वागत करता हूँ.

हाँ, एक और पते की बात जानें :

ब्लॉग को हिन्दी में चिट्ठा कहने की एक परम्परा सी चल पडी है.

हिन्दी के ब्लॉगर्स चिट्ठाकार कहे जाते हैं.

ब्लॉग क्या है इस के विषय में अच्छी जानकारी यहाँ से भी मिल जायेगी.
 
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