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Friday, 27 March 2015

जीवन रेखा (Life Line)

हाथ में मुख्यतः चार रेखाओ का उभार स्पष्ट रुप से रहता है( We can see four main line in palm)
जीवन रेखा (Life Line)

जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त हो जाती है (Life line start from heart line and end on Manibandh line)। यह रेखा भाग्य रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ व्यक्तियो की हथेली में जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में किसी भी बिन्दु पर मिल जाती है।जीवन रेखा तभी उत्तम मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न काट रही हो तथा वह लम्बी हो इसका अर्थ है कि व्यक्ति की आयु लम्बी होगी तथा अधिकतर जीवन सुखमय बीतेगा। रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम एंव जीवन संघर्षमय होगा(If there is breakage in life line or there is any cut it means your life is short and in struggle)।

भाग्य रेखा:(Fate Line)
हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने वाली सीधी रेखा को भाग्य रेखा कहते हैं (Straight Line start from middle of heart and end on Manibandh line called fate line) ।स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम भाग्य का घौतक है।यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार की रुकावट नही आती।परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य की हानि होती है।कुछ लोगो के हाथ में जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक ही रेखा होती है।इस स्थिति में वह व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर का भाग्यशाली होता है (If there is no fortune line on your palm it means you are not a middle class)। ऎसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन कभी नहीं जीता है।

हृदय रेखा: (Heart Line)
हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं (Vertical line starts from middle of palm and end on heart line called heart line)। यदि हृदय रेखा एकदम सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट बनाती है। यदि हृदय रेखा लहराती हुई चलती है तो वह व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है।यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है(There is Chance of heart attack if heart line is break)।

मस्तिष्क  रेखा:(Brain Line)
हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा  कहते हैं (Parallel line to heart line is called mind line)। यह आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे छोर तक (हथेली) जायें, यह बीच में ही किसी भी पर्वत (Planetary Mounts) की ओर मुड सकती है। यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है (Brain line is good if mind line or heart line are not together)। स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम मानी जाती है। कई बार मस्तिष्क रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है। ऎसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।

हाथ की मुख्य रेखाएं

                    हाथ की मुख्य रेखाएं

 

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं का विशेष महत्व है। इसमे सम्मलित लक्षण जैसे क्रास, सितारे, वर्गों और अर्धचन्द्राकार का अध्ययन हथेली द्वारा किया जाता है। यह रेखाएं व्यक्ति का भविष्य, शुभ संकेत और अशुभ संकेत दर्शाती हैं। इन संकेतो का निर्माण व्यक्ति के विचार और कर्मों पर भी निर्भर होता है। यह रेखाएं अपने नाम के अनुसार परिणाम देती हैं। हस्तरेखाविद् द्वारा हस्तरेखाएं जो विश्व भर मे प्रचलित है उनका विवरण नीचे किया जा रहा है

मस्तिष्क रेखा |

मस्तिष्क रेखा का आरंभ तर्जनी उंगली के नीचे से होता हुआ हथेली के दूसरे तरफ जाता है जब तक उसका अंत न हो । ज्यादातर, यह रेखा जीवन रेखा के आरंभिक बिन्दु  को स्पर्श करती है। यह रेखा व्यक्ति के मानसिक स्तर और बुद्धि के विश्लेषण को, सीखने की विशिष्ट विधा, संचार शैली और विभिन्न क्षेत्रों के विषय मे जानने की इच्छा को दर्शाती है।

हृदय रेखा |

हृदय रेखा का उद्गम कनिष्ठा उंगली के नीचे से हथेली को पार करता हुआ तर्जनी उंगली के नीचे समाप्त होता है। यह हथेली के उपरी हिस्से में उंगलियों के ठीक नीचे होती है। यह हृदय के प्राकृतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर को दर्शाती है। यह रोमांस कि भावनाओं, मनोवैज्ञानिक सहनशक्ति, भावनात्मक स्थिरता  और अवसाद की संभावनाओं का विश्लेषण करने के साथ ही साथ हृदय संबंधित विभिन्न पहलुओं की भी व्याख्या करती है।
जीवन रेखा |

जीवन रेखा अंगूठे के आधार से निकलती हुई, हथेली को पार करते हुए वृत्त के आकार मे कलाई के पास समाप्त होती है। यह सबसे विवादास्पद रेखा है। यह रेखा शारीरिक शक्ति और जोश के साथ शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की भी व्याख्या करती है। शारीरिक सुदृढ़ता और महत्वपूर्ण अंगों के साथ समन्वय, रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वास्थ्य का विश्लेषण करती है।
भाग्य रेखा |

भाग्य रेखा कलाई से आरंभ होती हुई चंद्र पर्वत से होते े हुये जीवन रेखा या मस्तिष्क या हृदय रेखा तक जाती है। यह रेखा उन तथ्यों को भी दर्शाती जो व्यक्ति के नियंत्रण के बाहर हैं, जैसे शिक्षा संबंधित निर्णय, कैरियर विकल्प, जीवन साथी का चुनाव और जीवन मे सफलता एवं विफलता  आदि।
सूर्य रेखा |

सूर्य रेखा को अपोलो रेखा, सफलता की रेखा या बुद्धिमत्ता की रेखा के नाम से भी जाना जाता है। यह रेखा कलाई के पास चंद्र पर्वत से निकलकर अनामिका तक जाती है। यह रेखा व्यक्ति के जीवन मे  प्रसिद्धि, सफलता और प्रतिभा  की  भविष्यवाणी करती है।
स्वास्थ्य रेखा |

स्वास्थ्य रेखा को बुध रेखा के रूप में भी जाना जाता है । यह कनिष्ठा के नीचे बुध पर्वत से आरंभ हो कर कलाई तक जाती है। इस रेखा द्वारा लाइलाज बीमारी को जाना जा सकता है। इसके द्वारा व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य की भी जानकारी मिलती है।
यात्रा रेखाएँ |

ये  क्षैतिज रेखाएं कलाई और हृदय रेखा के बीच हथेली के विस्तार पर स्थित है। यह रेखाएं व्यक्ति की यात्रा की अवधि की व्याख्या, यात्रा में बाधाओं और सफलता का सामना तथा यात्रा मे व्यक्ति के स्वास्थ्य की दशा को भी दर्शाती है।
विवाह रेखा |

क्षैतिज रेखाएं कनिष्ठा के बिल्कुल नीचे और हृदय रेखा के ऊपर स्थित विवाह रेखाएं कहलाती है। यह रेखाएं रिश्तों में आत्मीयता, वैवाहिक जीवन में खुशी, वैवाहिक दंपती के बीच प्रेम और स्नेह के अस्तित्व को दर्शाता है। विवाह रेखा का विश्लेषण करते समय शुक्र पर्वत और हृदय रेखा को भी ध्यान मे रखना चाहिये।
करधनी रेखाएं |

करधनी रेखा का आरंभ अर्धवृत्त आकार में कनिष्ठा और अनामिका उंगली के मध्य में और अंत  मध्यमा उंगली और तर्जनी  पर होता है। इसे गर्डल रेखा या शुक्र का गर्डल भी कहते हैं। यह व्यक्ति को अति संवेदनशील और उग्र बनाती है। जिन व्यक्तियों मे गर्डल या शुक्र रेखा पाई जाती है वह व्यक्ति की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
सिमीयन रेखा |

जो रेखा हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा को गठित करती है। सिमीयन रेखा, सिमीयन फोल्ड, सिमीयन क्रीज और ट्रांस्वर्स पाल्मर क्रीज़ के रुप में भी जानी जाती है। यह एक दुर्लभ रेखा है, मस्तिष्क और हृदय के संयोजन का प्रतिनिधित्व करती है। यह सिमीयन रेखा व्यक्ति मे मानसिक धैर्य और संवेदनशीलता  को दर्शाती है।

योनि मुद्रा योग का चमत्कार

            योनि मुद्रा योग का चमत्कार
 








इसका आध्यात्मिक लाभ : योनि मुद्रा बनाकर और पूर्व मूलबंध की स्थिति में सम्यक् भाव से स्थित होकर प्राण-अपान को मिलाने की प्रबल भावना के साथ मूलाधार स्थान पर यौगिक संयम करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं|

भौतिक लाभ : अंगूठा शरीर के भीतर की अग्नि को कंट्रोल करता है। तर्जनी अंगुली से वायु तत्व कंट्रोल में होता है। मध्‍यमा और अनामिका शरीर के पृथ्वी तत्व को कंट्रोल करती है। कनिष्ठा अंगुली से जल तत्व कंट्रोल में रहता है।

इसके निरंतर अभ्यास से जहां सभी तत्वों को लाभ मिलता है वहीं इससे इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शक्ति बढ़ती है।

इससे मन को एकाग्र करने की योग्यता का विकास भी होता है। यह शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मक का विकास करती है। इससे हाथों की मांसपेशियों पर अच्छा खासा दबाव बनता है जिसके कारण मस्तिष्क, हृदय और फेंफड़े स्वस्थ बनते हैं।


भौतिक लाभ : अंगूठा शरीर के भीतर की अग्नि को कंट्रोल करता है। तर्जनी अंगुली से वायु तत्व कंट्रोल में होता है। मध्‍यमा और अनामिका शरीर के पृथ्वी तत्व को कंट्रोल करती है। कनिष्ठा अंगुली से जल तत्व कंट्रोल में रहता है।

इसके निरंतर अभ्यास से जहां सभी तत्वों को लाभ मिलता है वहीं इससे इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शक्ति बढ़ती है।


इसका आध्यात्मिक लाभ : योनि मुद्रा बनाकर और पूर्व मूलबंध की स्थिति में सम्यक् भाव से स्थित होकर प्राण-अपान को मिलाने की प्रबल भावना के साथ मूलाधार स्थान पर यौगिक संयम करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं|

लक्ष्मी प्राप्ति की अद्वितीय साधनाएँ

           लक्ष्मी प्राप्ति की अद्वितीय साधनाएँ

 

दीपावली के दिन भी इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है और कहते हैं कि यदि दीपावली की रात्रि को इस मंत्र की 21 माला फेरे तो उसके व्यापार में उन्नति एवं आर्थिक सफलता प्राप्त होती।
ऊँ नमो पद्मावती पद्मनये लक्ष्मी दायिनी वाँछाभूत प्रेत
विंध्यवासिनी सर्व शत्रु संहारिणी दुर्जन मोहिनी ऋद्धि-सिद्धि
वृद्धि कुरू कुरू स्वाहा। ऊँ क्लीं श्रीं पद्मावत्यैं नमः।

सर्व कार्य सिद्ध मंत्र : आर्थिक, व्यावसायिक या व्यापारिक दृष्टि से किसी भी प्रकार की सफलता एवं उन्नति के लिए इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है। 31 माला मंत्र जप करने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। दीपावली की रात्रि को इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है। किसी भी प्रकार की माला का प्रयोग साधक कर सकता है। आसन किसी भी प्रकार हो सकता है। यदि रात्रि में इस मंत्र को सिद्ध किया जाए तो विशेष सफलता प्राप्त होती है।

ऊँ नमो महादेवी सर्वकार्य सिद्धकारिणी जो पाती पूरे
विष्णु महेश तीनों देवतन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री
गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरोमंत्र ईश्वरो वाचा।

बिक्री बढ़ाने का मंत्र : व्यापार में बिक्री बढ़ाने का यह अद्भुत एवं अचूक मंत्र है। इसका प्रयोग मात्र रविवार के दिन ही किया जाता है। किसी भी रविवार को प्रातः उठकर अपने हाथ में काले उड़द लेकर इस मंत्र का 21 बार जप करके उन उड़दों को व्यापार स्थल पर डाल दें, इस प्रकार केवल रविवार करें अर्थात् यह प्रयोग केवल रविवार के दिन ही किया जा सकता है। ऐसा करने पर उसके व्यापार में उन्नति होती है और आश्चर्यजनक रूप से बिक्री बढ़ती है।

भंवर वीर तूं चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा, उठे
जो डंडी बिकै जो माल भंवर वीर खाली नहीं जाय।
 

Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani


Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani




Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani
Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani

Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani
Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani

Durga Ambe Kali Kahat Ho
Durga Ambe Kali Kahat Ho
Durga Ambe Kali Kahat Ho
Durga Ambe Kali Kahat Ho

Navratri Maharani Suno Maiya Aadi Bhawani

Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani
Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani

Vinti Kar Fariyad Lagavey
Vinti Kar Fariyad Lagavey
Vinti Kar Fariyad Lagavey
Vinti Kar Fariyad Lagavey

Ghat Ghat Me Aap Samani Suno Maiya Aadi Bhawani

Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani
Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani

Brahama Vishnu Tum Ko Dhyave
Brahama Vishnu Tum Ko Dhyave
Brahama Vishnu Tum Ko Dhyave
Brahama Vishnu Tum Ko Dhyave
Aadi Shakti Mahararni Suno Maiya Aadi Bhawani

Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani
Sab Sukhiyan ki Dhani Suno Maiya Aadi Bhawani

O Jyotawali Mata Pahadawali Mata

           O Jyotawali Mata Pahadawali Mata



O Jyotawali Mata Pahadawali Mata
Jai Mata Di
Jai Mata Di
Jai Mata Di
Jai Mata Di
Pyar Se Bolo Jai Mata Di
Jor Se Bolo Jai Mata Di
Dil Se Bolo Jai Mata Di
Saare Bolo Jai Mata Di
O OO O O
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Suraj Aur Chand Sitaro Se Hai Uncha Naam Bhawani Ka
Uncha Naam Bhawani Ka
Vo Chhoot Gaya Papo Se Jisne Naam Liya Maharani Ka

Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Mai Pooja Iski Karti Hu Ye Meri Raksha Karti Hai
Ye Meri Raksha Karti Hai

Iske Hi Sahare Pe Mere Jeevan Ki Gadi Chalti Hai
Jeevan Ki Gadi Chalti Hai

Vardan Diya Jis Bhakti Ka Mai Shukra Karu Vardani Ka
Shukra Karu Vardani Ka

Vo Chhoot Gaya Papo Se Jisne Naam Liya Maharani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Ye Vaishno Mat Jwala Hai Ye Chamunda Bhi Kahlati Hai
Chamunda Bhi Kahlati Hai
Jis Roop Me Simare Jo Isko Maa Usi Roop Me Aati Hai
Gun Hai Karodo Hi Isme Gun Gaan Karo Kalyani Ka
Gun Gaan Karo Kalyani Ka

Vo Chhoot Gaya Papo Se Jisne Naam Liya Maharani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Faani Sansaar Ki Har Vastu Hai Maa Ambe Ke Haatho Me
Hai Maa Ambe Ke Haatho Me
Sab Iske Aage Jhukte Hai Ye Ek Hai Sakti Lakho Me
Ye Ek Hai Sakti Lakho Me
Duniya Me Saani Koi Nahi Iss Maa Shaktila Shami Ka

Vo Chhoot Gaya Papo Se Jisne Naam Liya Maharani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka
Naam Japo Maharani Ka Ambe Aadi Bhawani Ka

O Jyotawali Mata Pahadawali Mata
O Jyotawali Mata Pahadawali Mata

Jai Mata Di

Jhuthe Rishte Aur Naate Jhuthe Duniya Ki Bate

 Jhuthe Rishte Aur Naate Jhuthe Duniya Ki Bate




Jhuthe Rishte Aur Naate Jhuthe Duniya Ki Bate
Jhutha Hai Ye Sansaar
Maiyya Ji Bus Maiyya Ji Bus
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar

Jhuthe Rishte Aur Naate Jhuthe Duniya Ki Bate
Jhutha Hai Ye Sansaar
Maiyya Ji Bus Maiyya Ji Bus
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar

Sach Ko Pahchanu Mai Kaise Chehre Pe Chehara
Dar Lagta Hai Doob Naa Jau BhavSagar Hai Gahra
Diya Sabne Diya Sabne Diya Sabne
Diya Sabne Dokha Nahi Kisi Pe Bharosa
Ab Raha Naa Kisi Pe Etbaar
Maiyya Ji Bus Maiyya Ji Bus
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar

Yaha Pyar Ka Mol Nahi Hai Dil Toota To Jana
Apni Apni Le Kar Dafli Gaate Sabhi Tarana
Jana Jag Me Jana Jag Me Jana Jag Me
Jana Jag Me Yahi Hai Koi Kisi Ka Nahi Hai
Matlab Ke Sabhi Hai Yaar
Maiyya Ji Bus Maiyya Ji Bus
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar

Nahi Kisi Se Kisi Ko Matalab Sab Matalab Ke Saathi
Sharan Me Rakhna Mujko Maiya Tu Deepak Mai Baati
Haath Sir Pe Maa Haath Sir Pe Maa
Haath Sir Pe Maa Dharna Door Dar Se Naa Karna
Maiyya Ji Bus Maiyya Ji Bus
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar
Maiyya Ji Bus Sachcha Hai Tera Dwar
 
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